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एक दिवसीय युवा चेतना शिविर सम्पूर्ण सामग्री
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लक्ष्य और उद्देश्य

युग निर्माण योजना के अंतर्गत सामाजिक, नैतिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक क्रांति के माध्यम से मानव जीवन का नवोन्मेष।

गायत्री परिवार का मूल दर्शन

गायत्री परिवार एक जागरूक, सृजनशील और संस्कारित समाज की स्थापना हेतु प्रतिबद्ध एक वैश्विक आंदोलन है। इसका मूल दर्शन "वसुधैव कुटुम्बकम्" (सम्पूर्ण पृथ्वी ही हमारा परिवार है) और "आत्मवत् सर्वभूतेषु" (सभी प्राणियों को अपने समान मानना) के वैदिक मूल्यों पर आधारित है।

यह जाति, वर्ग, लिंग, रंग, भाषा या मजहब की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर संपूर्ण मानवता को एकता के सूत्र में पिरोने का अनूठा आध्यात्मिक प्रयास है।

मुख्य लक्ष्य (Core Objectives)

मनुष्य में देवत्व का उदय

आत्मिक साधना एवं आध्यात्मिक चिंतन के माध्यम से प्रत्येक मनुष्य के भीतर छिपे दिव्य सद्गुणों (प्रेम, करुणा, सेवा) को जागृत करना।

धरती पर स्वर्ग का अवतरण

धरती पर ऐसा वातावरण तैयार करना जहाँ युद्ध, घृणा, और संकीर्णता के स्थान पर आपसी सहयोग, शांति और वैश्विक सद्भाव का साम्राज्य हो।

त्रिआयामी निर्माण

personality निर्माण, परिवार निर्माण, एवं समाज निर्माण। सुधरे व्यक्ति से ही सुधरे समाज और एक आदर्श राष्ट्र का गठन संभव है।

स्वस्थ शरीर और पवित्र मन

साधना, संयम और निःस्वार्थ सेवा को दैनिक जीवन का आधार बनाकर व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक और आत्मिक संतुलन बनाए रखना।

एक सार्वभौमिक मानवता धर्म

"एक राष्ट्र - एक भाषा (प्रेम) - एक धर्म (मानवता) - एक शासन (आत्म-नियंत्रण)" के मूल जीवन-मूल्यों को समाज में पुनर्स्थापित करना।

समान अवसर व आत्मविकास

प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पृष्ठभूमि से परे उठकर आत्मविकास करने, ज्ञान अर्जित करने और सुसंस्कृत जीवन जीने का समान अधिकार सुनिश्चित करना।

१८ सूत्रीय युग सृजन योजना

विचार क्रांति को क्रियान्वित रूप देने तथा स्वर्णिम युग की आधारशिला रखने के लिए गायत्री परिवार के प्रमुख १८ रचनात्मक कार्यक्रम:

१. साधनात्मक कार्यों का विस्तार

नियमित जप के साथ गायत्री मंत्र लेखन या ५ गायत्री चालीसा पाठ का लोक-प्रचलन बढ़ाना ताकि आत्मिक प्रखरता का विस्तार हो सके।

२. यज्ञ आंदोलन

"गृहे-गृहे गायत्री यज्ञ" के अंतर्गत करोड़ों परिवारों में यज्ञीय वातावरण तैयार कर गृह एवं बाह्य पर्यावरण की शुद्धि करना।

३. आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी

गर्भ संस्कार (पुंसवन), मुण्डन, जन्मदिन और विवाह दिन जैसे प्रमुख ९ संस्कारों द्वारा सुसंस्कारिता का संवर्धन।

४. भागीरथी जलाभिषेक योजना

नदी स्वच्छता (विशेषकर गंगा एवं उसकी सहायक नदियाँ), श्रीराम सरोवर निर्माण और घर-घर जल संचयन (वाटर हारवेस्टिंग)।

५. वृक्षगंगा अभियान

करोड़ों पेड़ों का रोपण और गाँव-गाँव तथा तहसील स्तर पर श्रीराम स्मृति उपवनों (स्मृति वाटिकाओं) की स्थापना करना।

६. बाल संस्कार शालाएँ

एक लाख से अधिक स्थानों पर बाल संस्कार शालाओं की स्थापना करना ताकि बच्चों में बचपन से ही सुसंस्कारों का बीजारोपण हो।

७. संस्कृति मण्डल एवं परीक्षा

एक लाख स्कूलों में संस्कृति मण्डलों की स्थापना और भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का देशव्यापी विस्तार करना।

८. ग्रामतीर्थों की स्थापना

गाँवों में प्रज्ञा चौपाल, लोक कल्याण संवाद तथा सत्संग मण्डलियों की स्थापना कर आत्मनिर्भर ग्राम संस्कृति का विकास।

९. डिवाइन वर्कशॉप

विद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में युवाओं के लिए डिवाइन वर्कशॉप आयोजित कर नए कौशल और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार।

१०. संवेदना मूलक सेवा कार्य

शक्तिपीठों और जाग्रत प्रज्ञाकेन्द्रों के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों के लिए निःशुल्क भोजन, दवा और "नेकी की दीवार" की स्थापना।

११. वनवासी क्षेत्रों में आरण्यक

वनवासी स्वावलम्बी पुरोहित प्रशिक्षण और स्वालोकम् (स्वावलम्बी लोकसेवी मण्डल) द्वारा सामाजिक समरसता एवं रोजगार का सृजन।

१२. व्यसन मुक्ति आंदोलन

नशा और व्यसनों के विरुद्ध देशव्यापी जन-जागरण अभियान चलाकर युवाओं को विनाशकारी आदतों से मुक्ति दिलाना।

१३. कन्या-किशोर कौशल शिविर

कन्याओं और किशोरियों के स्वावलम्बन, आत्मरक्षा और सर्वांगीण सशक्तिकरण के लिए जिलेवार कौशल शिविरों का आयोजन।

१४. शक्तिपीठ वार्षिकी

सभी प्रज्ञा संस्थानों और शक्तिपीठों के स्थापना दिवस को उत्सव के रूप में मनाना तथा जन-कल्याण की गतिविधियों को गति देना।

१५. देवपरिवार निर्माण सत्र

कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को देवत्व के सिद्धांतों से जोड़ने के लिए दो-तीन दिवसीय विशेष देवपरिवार शिविरों का आयोजन।

१६. गौ आधारित कृषि व कौशल

भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नवनिर्माण हेतु जैविक कृषि, पंचगव्य चिकित्सा, और गौ-कौशल संवर्धन को बढ़ावा देना।

१७. साहित्य अनुवाद व प्रकाशन

मिशन के क्रांतिकारी विचारों को विश्व भर में पहुँचाने के लिए युग साहित्य का प्रांतीय एवं अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में अनुवाद।

१८. अखण्ड ज्योति एवं मीडिया

अखण्ड ज्योति पत्रिका के प्रसार को बहुगुणित करना और सोशल मीडिया के माध्यम से ज्ञानक्रांति का व्यापक प्रचार करना।

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