माँ की संस्कारशाला आंदोलन इस सिद्धांत पर आधारित है कि बालक का प्रथम विद्यालय उसका घर और प्रथम गुरु उसकी माँ होती है। इस अभियान के अंतर्गत माताओं को ऐसे प्रशिक्षण, साहित्य और मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है जिससे वे अपने बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण, चरित्र निर्माण और मूल्य-आधारित शिक्षा का सुदृढ़ आधार रख सकें।
इस आंदोलन के प्रमुख आयाम —
• संस्कार आधारित पालन-पोषण: बच्चों में सत्य, अनुशासन, करुणा, सेवा और राष्ट्रप्रेम जैसे मूल्यों का विकास।
• परिवार सुदृढ़ीकरण: परिवार को संस्कारों की प्रयोगशाला बनाना, जहाँ दैनिक जीवन में सद्गुणों का अभ्यास हो।
• मातृ-शक्ति जागरण: माताओं को आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक परंपराओं और जीवन-कौशल के प्रशिक्षण द्वारा सक्षम बनाना।
• बाल-संस्कार कार्यक्रम: नियमित बाल-संस्कार शालाएँ, कथा-चर्चा, प्रार्थना, योग, एवं नैतिक शिक्षण सत्रों का आयोजन।
• युग निर्माण की आधारशिला: संस्कारित पीढ़ी के माध्यम से आदर्श समाज एवं राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रयास।
यह आंदोलन युग निर्माण योजना का महत्वपूर्ण अंग है, जिसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को संस्कारित, सजग और जिम्मेदार नागरिक बनाना है।