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शान्तिकुञ्ज हरिद्वार का युवा अभियान

युवा मण्डल
नवयुग निर्माण

उपासना
स्वाध्याय
लोकमंगल

18 से 45 वर्ष के युवाओं द्वारा संचालित नवयुग निर्माण का महान आंदोलन। उपासना, स्वाध्याय और लोकमंगल के तीन मूल आधारों पर समाजहित में सक्रिय योगदान।

मण्डल विवरण खोजें (Credential Hint): सभी क्रेडेंशियल (मण्डल ID, मोबाइल नंबर, और मण्डल पंजीकरण संख्या / पासवर्ड) मण्डल पंजीकरण के समय शान्तिकुञ्ज से प्राप्त मण्डल पत्र में दिए गए हैं।
All credentials (Mandal ID, Mobile Number, and Password/MRN) are printed in the Yuva Mandal letter issued from Shantikunj.
18-45

वर्ष आयु

युवाओं के लिए
3

मूल आधार

उपास्य, स्वाध्याय, सेवा
30

पूर्ण इकाई

सदस्य संख्या

संभावनाएँ

नवयुग निर्माण की
प्रस्तावना

वर्तमान समय की महत्ता

वर्तमान समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। मानवता को संभावित विनाश से बचाकर उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर करने के लिए दैवी योजना को संगठित रूप में लागू किया जा रहा है। मनुष्यों को दुर्भाव, दुर्बुद्धि और दुष्कर्मों से मुक्त कर सद्भाव, सद्बुद्धि एवं सत्कर्म की दिशा में प्रेरित करना ही इस युगधर्म का लक्ष्य है।

युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने देव संस्कृति के दिव्य सूत्रों को जन-जन तक पहुँचाने हेतु एक संगठित परिवार का निर्माण किया—गायत्री परिवार / युग निर्माण परिवार

प्रज्ञा मण्डल

समाज के प्रज्ञावान नेताओं का संगठन

महिला मण्डल

समाज की महिला शक्ति का सशक्तिकरण

युवा मण्डल

युवा शक्ति का संगठित विकास

संस्कृति मण्डल

देव संस्कृति का प्रकाश फैलाना

ऐतिहासिक आधार

संगठन की शुरुआत और विकास

1958

मथुरा में सहस्त्र कुण्डीय महायज्ञ

संगठन की सशक्त शुरुआत के साथ हजारों शाखाओं का पंजीयन हुआ।

1989

प्रज्ञा मण्डलों की घोषणा

आज लाखों की संख्या में मण्डल शान्तिकुञ्ज से पंजीकृत होकर देशभर में सक्रिय हैं।

संगठित परिजन ही उच्च स्तर की जिम्मेदारियाँ निभा सकते हैं। युवा मण्डल इसी महान संगठन की आधारभूत इकाई है।
स्वरूप और संरचना

युवा मण्डल का संगठन

परिभाषा

युवा मण्डल 18 से 45 वर्ष आयु के युवाओं का संगठित समूह है (जिसमें युवतियाँ भी सम्मिलित हैं)।

संगठन संरचना

ग्राम/मोहल्ला स्तरयुवा मण्डल
कई मण्डलनव चेतना विस्तार केन्द्र (स-3)
विकासखण्ड स्तरसंयुक्त समन्वय समिति (युवा प्रतिनिधि सहित)
जिला स्तरसंयुक्त समन्वय समिति (युवा प्रतिनिधि सहित)
उपजोन / जोन स्तरयुवा प्रकोष्ठ
केन्द्रीय जोनल संगठन तंत्रशान्तिकुञ्ज, हरिद्वार

गठन की संरचना

5

न्यूनतम सदस्य

1 संयोजक + 4 सहयोगी
30

पूर्ण इकाई

अनिवार्य सदस्य संख्या
2K-5K

जनसंख्या

प्रति क्षेत्र आबादी
गठन प्रक्रिया

मण्डल स्थापना के चरण

01

परिक्षेत्र निर्धारण

प्रत्येक क्षेत्र (2K–5K) में एक मण्डल

02

परिवार व्यवस्था

एक परिवार से एक सदस्य

03

न्यूनतम गठन

न्यूनतम 5 सक्रिय सदस्य

04

पंजीयन

पत्रक भरकर भेजें

05

दस्तावेज़

रजिस्टर व रिकॉर्ड रखें

06

प्रौढ़ मित्र

वरिष्ठ मार्गदर्शन

मूल आधार

तीन मूल आधार

उपासना

प्रतिदिन स्नान के बाद
  • 10 मिनट गायत्री जप
  • ईश्वरीय शक्ति से जुड़ना

स्वाध्याय

नियमित अध्ययन
  • युगऋषि साहित्य अध्ययन
  • श्रेष्ठ विचार अपनाना

लोकमंगल

समाज सेवा
  • 1 घंटा समयदान
  • ₹1 अंशदान
  • समाजहित में योगदान
साप्ताहिक कार्यक्रम

साप्ताहिक संगोष्ठी (अनिवार्य)

अवधि: 1.5-2 घंटे

1

सामूहिक उपासना

  • ♦ भजन-कीर्तन
  • ♦ गुरु वंदना
  • ♦ 24 बार मंत्र
  • ♦ दीपयज्ञ
  • ♦ 15 मिनट जप
2

स्वाध्याय-सत्संग

  • ♦ पूर्व निर्धारित विषय
  • ♦ साहित्य अध्ययन
  • ♦ विचार विमर्श
  • ♦ सामूहिक चर्चा
  • ♦ संदर्भ चर्चा
3

प्रगति समीक्षा

  • ♦ समयदान समीक्षा
  • ♦ जनसंपर्क समीक्षा
  • ♦ उत्तरदायित्व निर्धारण
  • ♦ समाधान
  • ♦ प्रगति मूल्यांकन
4

सेवाकार्य

  • ♦ रचनात्मक कार्य
  • ♦ घर-घर संपर्क
  • ♦ प्रसाद वितरण
  • ♦ समाज संपर्क
  • ♦ सेवार्थ निर्देशन
सदस्य अपेक्षाएँ

युवा मण्डल सदस्य की प्रतिबद्धता

नशा निवारण

नशा, दुर्व्यसन एवं अश्लीलता से दूर रहें।

नियमित अनुशीलन

नियमित गायत्री उपासना व स्वाध्याय करें।

गरिमामय आचरण

मिशन की गरिमा अनुरूप आचरण रखें।

सेवा में सहयोग

वरिष्ठों से मार्गदर्शन लेकर सृजनात्मक कार्यों में सहयोग करें।

युवा राष्ट्र का रक्त है। यदि युवा शुद्ध, सजग और सशक्त है तो राष्ट्र प्रगति करेगा।
कार्य क्षेत्र

प्रमुख कार्यक्षेत्र

प्रचारात्मक

  • घर-घर आस्तिकता
  • संस्कार परंपरा
  • कार्यकर्ता प्रशिक्षण

सृजनात्मक

  • नशा निवारण
  • शिक्षा विस्तार
  • स्वास्थ्य व पर्यावरण
  • स्वावलंबन व उद्योग

संगठनात्मक

  • मण्डल सुदृढ़ीकरण
  • केन्द्र से जुड़ाव
  • नियमित प्रशिक्षण

कार्यालयीन व्यवस्था

हर मण्डल के पास ये अद्यतन रिकॉर्ड होने चाहिए:

  • आबादी विवरण
  • सदस्य सूची
  • देव परिवार सूची
  • दान सूची
  • पत्रिका ग्राहक
  • संस्कार रिकॉर्ड
  • प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची
महत्वपूर्ण: मासिक समीक्षा एवं संशोधन आवश्यक है।

अर्थानुशास्त्र

वित्तीय प्रबंधन के सिद्धांत:

  • श्रद्धा आधारित अंशदान
  • पारदर्शी लेखा व्यवस्था
  • ट्रस्ट की वैधानिक रसीदें
  • बैंक खाता व्यवस्था
  • साप्ताहिक हिसाब प्रस्तुति
  • पीठ/ट्रस्ट से तालमेल
नीति: ईमानदारी और पारदर्शिता ही संगठन की प्रतिष्ठा का आधार है।
संगठन के लाभ

संगठन के मुख्य लाभ

मनोबल वृद्धि

आत्मविश्वास का संचार

सकारात्मक संगति

सच्ची मित्रता का वातावरण

सामाजिक सम्मान

समाज में प्रतिष्ठा

आदर्श ग्राम निर्माण

सुखी और संपन्न समाज

सामूहिक ऊर्जा

शक्तिशाली समग्र विकास

संपर्क सूत्र

हमसे जुड़ें

युवा प्रकोष्ठ – शान्तिकुञ्ज, हरिद्वार

युवा मण्डल का अंग बनें

नवयुग निर्माण के इस महान अभियान में शामिल होकर देश की सेवा करें।

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