18 से 45 वर्ष के युवाओं द्वारा संचालित नवयुग निर्माण का महान आंदोलन। उपासना, स्वाध्याय और लोकमंगल के तीन मूल आधारों पर समाजहित में सक्रिय योगदान।
वर्ष आयु
युवाओं के लिएमूल आधार
उपास्य, स्वाध्याय, सेवापूर्ण इकाई
सदस्य संख्यासंभावनाएँ
नवयुग निर्माण कीवर्तमान समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। मानवता को संभावित विनाश से बचाकर उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर करने के लिए दैवी योजना को संगठित रूप में लागू किया जा रहा है। मनुष्यों को दुर्भाव, दुर्बुद्धि और दुष्कर्मों से मुक्त कर सद्भाव, सद्बुद्धि एवं सत्कर्म की दिशा में प्रेरित करना ही इस युगधर्म का लक्ष्य है।
युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने देव संस्कृति के दिव्य सूत्रों को जन-जन तक पहुँचाने हेतु एक संगठित परिवार का निर्माण किया—गायत्री परिवार / युग निर्माण परिवार।
समाज के प्रज्ञावान नेताओं का संगठन
समाज की महिला शक्ति का सशक्तिकरण
युवा शक्ति का संगठित विकास
देव संस्कृति का प्रकाश फैलाना
संगठन की सशक्त शुरुआत के साथ हजारों शाखाओं का पंजीयन हुआ।
आज लाखों की संख्या में मण्डल शान्तिकुञ्ज से पंजीकृत होकर देशभर में सक्रिय हैं।
युवा मण्डल 18 से 45 वर्ष आयु के युवाओं का संगठित समूह है (जिसमें युवतियाँ भी सम्मिलित हैं)।
न्यूनतम सदस्य
1 संयोजक + 4 सहयोगीपूर्ण इकाई
अनिवार्य सदस्य संख्याजनसंख्या
प्रति क्षेत्र आबादीप्रत्येक क्षेत्र (2K–5K) में एक मण्डल
एक परिवार से एक सदस्य
न्यूनतम 5 सक्रिय सदस्य
पत्रक भरकर भेजें
रजिस्टर व रिकॉर्ड रखें
वरिष्ठ मार्गदर्शन
अवधि: 1.5-2 घंटे
नशा, दुर्व्यसन एवं अश्लीलता से दूर रहें।
नियमित गायत्री उपासना व स्वाध्याय करें।
मिशन की गरिमा अनुरूप आचरण रखें।
वरिष्ठों से मार्गदर्शन लेकर सृजनात्मक कार्यों में सहयोग करें।
हर मण्डल के पास ये अद्यतन रिकॉर्ड होने चाहिए:
वित्तीय प्रबंधन के सिद्धांत:
आत्मविश्वास का संचार
सच्ची मित्रता का वातावरण
समाज में प्रतिष्ठा
सुखी और संपन्न समाज
शक्तिशाली समग्र विकास
युवा प्रकोष्ठ – शान्तिकुञ्ज, हरिद्वार
नवयुग निर्माण के इस महान अभियान में शामिल होकर देश की सेवा करें।
अभी शामिल हों