"वृक्ष गंगाअभियान अखिल विश्व गायत्री परिवार का एक प्रेरणादायी जन-अभियान है, जिसमें वृक्षों को पुत्र अथवा मित्र के रूप में स्वीकार कर उनके रोपण, संरक्षण एवं पालन-पोषण का संकल्प लिया जाता है। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन और प्रकृति के प्रति आत्मीयता की भावना को बढ़ावा देता है।"
कुल लगाए गए पौधे
कितने युवा प्रतिभागी शामिल हुए?
साप्ताहिक वृक्षारोपण अभियान का 137वाँ सप्ताह सफलतापूर्वक संपन्न ☘️अखिल विश्व गायत्री परिवार की युवा इकाई …
🚩आज दिनांक 09/08/2026दिन रविवार को अखिल विश्व गायत्री परिवार की युवा इकाई प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ …
✍🏿युवा प्रकोष्ठ, गायत्री परिवार, कटिहार द्वारा चलाए जा रहे साप्ताहिक वृक्षारोपण अभियान के तहत दिनांक …
Gpyg वडोदरा टीम पीछे 10 वर्ष से हर रविवार वृक्षारोपण का कार्य नियमित कर रही …
साप्ताहिक वृक्षारोपण अभियान का 137वाँ सप्ताह सफलतापूर्वक संपन्न ☘️अखिल विश्व गायत्री परिवार की युवा इकाई …
🚩आज दिनांक 09/08/2026दिन रविवार को अखिल विश्व गायत्री परिवार की युवा इकाई प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ …
✍🏿युवा प्रकोष्ठ, गायत्री परिवार, कटिहार द्वारा चलाए जा रहे साप्ताहिक वृक्षारोपण अभियान के तहत दिनांक …
Gpyg वडोदरा टीम पीछे 10 वर्ष से हर रविवार वृक्षारोपण का कार्य नियमित कर रही …
अखिल विश्व गायत्री परिवार का वृक्षारोपण कार्यक्रम एक अनूठा जन-अभियान है, जिसके अंतर्गत वृक्षों का रोपण उन्हें पुत्र अथवा मित्र के रूप में स्वीकार करके किया जाता है तथा उनके पालन-पोषण और संरक्षण का संकल्प लिया जाता है। विगत वर्षों में मानव समाज ने वृक्षों और वनों के प्रति उपेक्षा का भाव अपनाया। उन्हें केवल आर्थिक लाभ का साधन समझा गया। परिणामस्वरूप वनों का निरंतर विनाश होता गया और आज मानव असंतुलित पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन तथा अनेक प्राकृतिक संकटों का सामना करने के लिए विवश है। गायत्री परिवार ने वृक्षों के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और आत्मीयता का भाव जागृत करते हुए उन्हें पुत्र एवं मित्र के समान मानने की प्रेरणा दी है। इसी भावना के साथ जन-जन की सहभागिता से "वृक्ष गंगा" नामक व्यापक वृक्षारोपण अभियान प्रारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य केवल वृक्ष लगाना ही नहीं, बल्कि उनका संरक्षण, संवर्धन और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व का भाव विकसित करना भी है।
वृक्ष विषपायी शिव हैं जो सदा कल्याण करते हैं। वे संसार के विष (CO₂) को पीकर कल्याणकारी प्राणदायी प्राणवायु (O₂) प्रदान करते हैं। अपने जीवनकाल में करोड़ों की सम्पदा प्रकृति में लुटाते हैं और अपने देवता होने का प्रमाण देते हैं। एक मनुष्य को सम्पूर्ण जीवनकाल में जितनी ऑक्सीजन एवं काष्ठ की आवश्यकता होती है उसे तीन पेड़ मिलकर पूरा करते हैं। अतः हम सभी को अपनी सांसों के कर्ज से मुक्ति हेतु न्यूनतम तीन वृक्ष लगाना और पालना चाहिए।
वृक्ष ही हमारे जीवन साथी हैं, बचपन के पालने से लेकर अन्त्येष्टि की लकड़ी इन्हीं से प्राप्त होती है। वृक्ष ही हैं जो बादलों को आकर्षित करते हैं, नदियों को सदानीरा बनाते हैं और प्राणी जगत के जीवन को आधार देते हैं।
एक वृक्ष द्वारा अपने जीवन चक्र में समाज व प्रकृति को दिए जाने वाले विभिन्न भौतिक अनुदानों का सांख्यिकीय मान निम्नलिखित है:
| विभिन्न भौतिक अनुदान | अनुदानों के सांख्यिकीय मान (रु. में) |
|---|---|
| ऑक्सीजन का उत्पादन | 6.7 lakh |
| पशु मांस और हड्डी में रूपांतरण | 1.9 लाख |
| मिट्टी का क्षरण नियंत्रण और उर्वरता वृद्धि | 6.40 लाख |
| पानी का पुनर्चक्रण, नमी और वायु तापमान नियंत्रण | 99 लाख |
| पक्षियों, गिलहरियों और कीड़ों को आश्रय | 83 लाख |
| हवा का शुद्धिकरण | 258 लाख |
| कुल भौतिक अनुदान | 455 लाख |
अतः वृक्ष गंगा अभियान के अन्तर्गत तरुपुत्र/तरुमित्र योजना में भागीदार बनकर एक वृक्ष का रोपण कर उसे पुत्रवत् पालने अथवा मित्रवत् उसकी रक्षा करने का संकल्प करें। समाज को पाँच करोड़ से अधिक राशि का अनुदान देने का पुण्य कमाएँ तथा आने वाली पीढ़ियों को विरासत में हरा जीवन और खुशहाली देकर जाएँ।
आसन्न पर्यावरण संकट यथा-ग्लोबल वार्मिंग, ग्रीन हाउस प्रभाव, मौसम चक्र का असंतुलन, बढ़ता प्रदूषण, विरल ओजोन परत के संबंध में जन-जागरण करना एवं समाधान हेतु वृक्षगंगा अभियान में भागीदार बनाना।
शहर व नगर के सार्वजनिक स्थलों पर विकसित करने हेतु उपयोगी प्रकल्प।
शहर-नगर से दूर व गाँवों की परती/खाली भूमि व पहाड़ियों के लिए वनीकरण पहल।
घर व फार्म हाउस आदि निजी स्तर पर हरित क्षेत्र तैयार करने के लिए योजना।
घर के बच्चों द्वारा आँगन, छत या बालकनी पर छोटा ग्रीन कॉर्नर तैयार करना।
यह शहर एवं नगरों के सार्वजनिक स्थलों के लिये एक बहुत ही उपयोगी सेवा का रचनात्मक प्रकल्प है। इसके द्वारा मानव समाज को अच्छा स्वास्थ्य, पर्यावरण का संवर्धन और प्रकल्प को संचालित करने वाले व्यक्ति/संस्था को स्वावलंबन प्राप्त होता है।
उपवन के एक्यूप्रेशर पथ पर भ्रमण से व्यक्ति का प्राकृतिक एक्यूप्रेशर उपचार होता है और जीवन निरोग बनता है। पथ के साथ लगी आयुर्वेद औषधियों की आरोग्यवर्द्धक प्राणवायु प्राप्त होती है। इसके मध्य स्थापित दिव्य वृक्षों के नवग्रह वृक्ष मण्डल, वास्तु वृक्ष मण्डल, त्रिवेणी, त्रिदेव, हरिशंकरी, देववृक्ष, तुलसी, कल्पवृक्ष, यज्ञशाला आदि की परिक्रमा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। प्राकृतिक आहार केन्द्र संचालित होने से ताजे स्वास्थ्य वर्द्धक प्राकृतिक पेय (ज्वारा, आँवला, एलोवेरा, लौकी, करेला, पालक, टमाटर, गाजर आदि रस), गौमूत्र, पंचगव्य, शहद-नीबू-पानी और अंकुरित आहार सेवन के कारण प्राकृतिक रूप से व्यक्ति स्वस्थ रहता है।
इसे शहर, नगर या कॉलोनी के मध्य सार्वजनिक या निजी उद्यानों को गोद लेकर या भूमि खरीदकर विकसित कर संचालित किया जा सकता है।
स्मृति वन/पर्वत शहर नगरों से दूर, गाँवों की खाली भूमि व पहाड़ियों को हरा-भरा करने, पर्यावरण संवर्द्धन, भूमि-जल संरक्षण तथा प्रकृति-संतुलन द्वारा ग्लोबल वार्मिंग रोकने हेतु बहुत ही उपयोगी सेवा कार्य है। साथ ही समाज में व्यक्ति की स्मृतियों, जन्म दिवस, विवाह दिवस, पुण्य तिथि आदि को चिर स्थायी बनाये रखने के लिये वृक्षों को रोपित करने का एक देवकार्य भी है।
प्रत्येक घर के लिये यह बहुत ही उपयोगी प्रकल्प है। इसके माध्यम से प्रत्येक घर, जहाँ वाटिका हेतु भूमि न भी हो, वहाँ भी गमलों में युगऋषि के स्वप्न को साकार कर मसाला वाटिका, गमलों में स्वास्थ्य वर्धक जड़ी बूटियाँ, तुलसी, दिव्य वृक्ष वास्तु मण्डल, शाक सब्जियाँ आदि लगाएँ, जिससे परिवार को स्वास्थ्य, स्वावलंबन व सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त हो।
घटक: मसाला वाटिका, स्वास्थ्य रक्षक औषधियाँ, शाक सब्जियाँ, तुलसी वाटिका।
उपलब्धियाँ: स्वास्थ्य संवर्धन, सकारात्मक ऊर्जा, श्रम का सदुपयोग, धन की बचत व राष्ट्र सेवा।
बाल संस्कार शाला के बच्चों के द्वारा आँगन, छत अथवा बालकनी में एक छोटा स्थान (जैसे 5 फुट × 5 फुट) निश्चित कर लगभग 50 पौधों को नर्सरी बैग में तैयार करना और उनका संरक्षण करना।
अभियान से जुड़ने, मार्गदर्शन प्राप्त करने अथवा जानकारी साझा करने हेतु यहाँ संपर्क करें: