कुछ यादें तस्वीरों में नहीं, किसी के चेहरे की मुस्कान में ज़िंदा रहती हैं। श्रीमती सजुला श्रीनिवासन जी ने अपने पूज्य पिता श्री के. जी. सदाशिवन जी की पुण्यतिथि को केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि सेवा और संवेदना का दिन बनाया। बच्चों के लिए सहयोग का हाथ बढ़ाकर— यही वह श्रद्धांजलि है, जो शब्दों से आगे जाकर किसी के भविष्य को छूती है। क्योंकि किसी अपने की याद को सबसे खूबसूरत तरीके से जीवित रखा जा सकता है— किसी और के जीवन में रोशनी बनकर। वाल्मीकि संस्कारशाला हृदय से नमन करता है श्री रमेश सिंह जी एवं श्रीमती सजुला श्रीनिवासन जी को, जो गुड़गांव में सेवा की भावना को निरंतर आगे बढ़ाते हुए उद्देश्य और सामाजिक सरोकारों के बीच एक सशक्त सेतु बने हुए हैं। आपका यह समर्पण हमें याद दिलाता है— स्मृतियाँ तब अमर होती हैं, जब उनसे किसी का भविष्य संवरता है। श्री के. जी. सदाशिवन जी की पुण्य स्मृति को शत्-शत् नमन।