ईशान युवा मंडल उन्नाव - गठन से पूर्व का संघर्ष और यात्रा 1. शुरुआत - प्रेरणा की चिंगारी ईशान युवा मंडल की नींव 2022 में पड़ी। मई 2022 में श्री सुरेश कुमार शर्मा जी ने गायत्री परिवार से परिचय कराया। उनके बार-बार आग्रह पर मैंने अखंड-दीप के माध्यम से गुरुदेव के प्रति समर्पण की भावना जगी। 2. पहला बड़ा संघर्ष - परिवार का विरोध जनवरी 2023 में जब मैं 10 लोगों के साथ शांतिकुंज जाने का निश्चय किया, तो सबसे बड़ा विरोध अपने ही परिवार से हुआ। परिवार के विरोध के बावजूद हम 10 लोग शांतिकुंज पहुंचे।छोटे भाई संदीप द्विवेदी का जनेऊ संस्कार कराने हेतु बस यहीं से "गुरुदेव की प्रेरणा की परंपरा" शुरू हुई जो आज तक चल रही है। 3. प्रशिक्षण और सीख : कामिनी पांडेय, ब्रजेश कुमार, रेखा देवी, रमेश चंद्र मिश्रा ने नौ दिवसीय साधना शिविर में भाग लिया। युग शिल्पी शिविर: कामिनी पांडेय और रेखा देवी ने प्रशिक्षण लिया। इन शिविरों से हमें युग निर्माण का उद्देश्य और कार्यशैली समझ में आई। 4. मंडल गठन से पहले की सबसे बड़ी चुनौतियां जब हमने क्षेत्र में काम शुरू करना चाहा तो 5 मुख्य समस्याएं सामने आईं:जागरूकता का अभाव: युवाओं को गायत्री परिवार और युग निर्माण के उद्देश्य की जानकारी नहीं थी।टीम का अभाव: रचनात्मक कार्यक्रमों के लिए समर्पित युवाओं की टीम नहीं थी। संसाधनों की कमी: आर्थिक सहयोग और संसाधनों की भारी कमी थी। मार्गदर्शन की कमी: आध्यात्मिक व नैतिक शिक्षा देने वाले माध्यम नहीं थे।पहचान का अभाव: भगवंत नगर और आसपास के क्षेत्र में संगठित शक्ति का अभाव था। 5. टूटने के बाद भी ना हारना हमने 5 लोगों - प्रदीप द्विवेदी, श्री नारायण, संदीप द्विवेदी, नीलेश कुमार, वीरेंद्र सिंह - के नाम 14/05/25 को शांतिकुंज भेजे थे। लेकिन कई बार प्रयास के बाद भी मंडल तुरंत नहीं बन पाया। इस असफलता के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। श्री नारायण और प्रदीप द्विवेदी और ऋषि द्विवेदी शांतिकुंज जाकर संपर्क किया और मार्गदर्शन लिया जहां पर हमारी भेट श्री सुभाष त्रिपाठी भारतीय संस्कृत ज्ञान परीछा विभाग के भाई साहब से हुई जिन्होंने हमें युवा प्रकोष्ठ शांतिकुंज कार्यालय भेजा जहां आगे की प्रकिया पुरी हुई | निष्कर्ष: ईशान युवा मंडल एक दिन में नहीं बना। परिवार के विरोध, संसाधनों की कमी, टीम न बन पाने और कई बार असफल होने के बाद भी "गुरुदेव की प्रेरणा" के सहारे हम डटे रहे। इन्हीं संघर्षों ने हमें मजबूत किया और अंततः युग निर्माण के पावन उद्देश्य के लिए मंडल का गठन संभव हो पाया।